जानिए धरण ढिगने का बेहतरीन इलाज | Dharan Ka ilaj in Hindi

सबसे पहले तो आपका HindiMedicines.com पर हार्दिक स्वागत है।आज हम आपको Dharan Ka ilaj, Dharan ka desi ilaj, Pet ki dharan ka ilaj in hindi. इन सबके बारे में  विस्तृत जानकारी प्रदान करेंगे। तो चलिए आगे पढ़ते हैं की Dharan को सही कैसे कर सकते हैं। 

Dharan क्या है? 

नाभि खिसकने (Navel Displacement)की समस्या के बारे मे आपने सुना ही

होगा। ज्यादातर लोग इसे  नाभि का डिगना,  धरण डिगना (Navel Displacement) के नाम से  भी जानते हैं। 

पातंजल योगशाश्त्र में महर्षि पतंजलि ने मानव शरीर की 72000 नाड़ीयों  का Starting Point नाभि है।  नाभि (Dharan) शरीर के बीच में स्थित होती है ।और यही मानव शरीर का केन्द्र है।   

नाभि ही गर्भस्थ शिशु का जीवन-स्रोत और माता और गर्भ के बीच का सेतू हैं।   

मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए नाभि का अपने वास्तविक स्थान पर स्थित होना बहुत आवश्यक है।  

नाभि का खिसकना जिसे आम भाषा में धरण (Dharan) खिसकना  कहते हैं।Dharan के खिसकने से  दस्त लगना, मंदाग्नि,  पेचिस, भूख में कमी आना,  पेट में दर्द, कब्ज़ होना, सर्दी-ज़ुकाम, कफ, अपच एंव आफ़रे जैसी परेशानियाँ हो सकती हैं

माना जाता है की पुरुषों की नाभि Left side और स्त्रियों की नाभि Right Side खीसकती है।इसके खिसकने से मनुष्य की  मानसिक एंव  आध्यात्मिक क्षमताएँ कम हो जाती हैं।  

Dharan Dhigne Ke Lakshan or Nuksan 

  • नाभि वाली जगह काफी कठोर हो जाती है।  
  • पेट दर्द की दवा लेने के बाद भी यह दर्द खत्म नहीं होता है।   
  • Dharan Dhigne से किडनी में कठोरता आती है। 
  • दर्द के साथ कई बार नाभि खिसकने से दस्त भी लग जाते हैं।  
  • इसके खिसकने से घबराहट, उल्टी, एंव जी मिचलाने लगता है। 
  • नाभि के खिसक जाने पर कब्ज की शिकायत हो  जाती है।और जब तक नाभि अपने स्थान पर नहीं आती है, तब तक कब्ज ठीक नहीं हो सकती है।पेट में गड़गड़ाहट की आवाजें आने लगती हैं। 
  • Dharan Dhigne से  स्वप्न दोष तथा पाचनतंत्र   संबंधित समस्या हो सकती है। 
  • नाभि खिसकने से आँखों और बालों पर भी बहुत  नकारात्मक प्रभाव पड़ने लगता है। 
  • दाँतों की प्राकृतिक चमक कम होने लगती है।  
  • Dharan Dhigne से महिलाओं में मासिक धर्म  संबंधित विकार उत्पन्न हो सकते हैं।  
  • नाभि नीचे खिसक जाए तो पतले दस्त होने लगते हैं।  
  • इससे लीवर  भी खराब हो सकता है।  
  • इससे आंतों में भी दर्द होने लगता है। 

नाभि खिसकने के कारण – Dharan Dhigne Ke Karan 

  • पेट की मांशपेशियाँ और नाड़ियाँ  कमजोर होने के कारण भी नाभि खिसकने की सम्भावना अधिक  होती है।  
  • अचानक से ज्यादा भार उठा लेने के कारण । 
  • दैनिक कार्य करते समय शारीरिक संतुलन बिगड़ने के कारण भी नाभि खिसक सकती है।  
  • खेलते समय किसी प्रकार का झटका लगना। 
  • अधिक मात्रा में मसालेदार भोजन करना। 
  • अचानक एक हाथ से वजन उठाने के कारण Dharan Khisak सकती है। 
  • असावधानी से दाएं या बाएं झुकना। 
  • तेजी से सीढ़ियां चढ़ने-उतरने के कारण भी यह  समस्या हो सकती है। 
  • रास्ते में चलते हुए किसी गड्ढे में अचानक पैर चले जाना।  
  • कुछ यौन गतिविधियां में असावधानी के कारण। 
  • एक पैर पर ज्यादा देर तक दबाव डालकर खड़े होने के कारण भी नाभि भी खिसक सकती है। 

Nabhi Ke Khiskne or Dharan Ke Dhigne Ka Pta Kaise Lgaye 

नाभि में नाड़ी कि Vibration को महसूस करें  

नाभी के खिसकने (Dharan Ke Dhigne) का पता करने के लिए सबसे पहले जमीन पर पीठ के बल लेट जाए फिर अपने हाथों की अंगुलियों या अंगूठे से नाभि पर  हल्के दबाव डालकर Vibration check  करें।   

यदि Vibration ठीक नाभि पर महसूस होता है तो  नाभि बिल्कुल सही है।यदि Vibration नाभि के स्थान से हटकर ऊपर, नीचे, दायें या बाएं  महसूस हो तो नाभि सही स्थान पर नहीं है।  

Dharan Ka Desi Ilaj in Hindi | Dharan Ka Ilaj | 

  1. Dharan Ka Ilaj करने के लिए सरसों के तेल को नाभि पर लगाएं  इससे नाभि अपनी जगह  पर आ जाती है।  
  1. 250 ग्राम दही में एक चम्मच पिसी हुई हल्दी को  मिलाकर खाने से नाभि अपने स्थान से नहीं हटती है।  
  1. रोगी को सीधा सुलाकर उसकी नाभि के चारों ओर सूखे आँवले का आटा बनाकर उसमें अदरक का  रस सहित तीन घंटे के लिए बाँध दें।  
  1. Pet ki dharan ka ilaj करने के लिए रोगी को  दिन में दो बार  2 से 3 ML अदरक का रस पिलाएं।  
  1. Dharan ka desi ilaj करने के सुबह खाली पेट एक चम्मच  आंवले का चूर्ण, एक गिलास गुनगुने पानी में एक  नींबू निचोड़ कर पियें।  
  1. शवासन में लेट कर, पेट पर नाभि के ऊपर जलता हुआ दीपक रखने कर, लोटे  को उसपर उल्टा रख देना।  थोड़ी देर में दीपक बुझ जाएगा और लोटा नाभि क्षेत्र की त्वचा पर चिपक जाएगा। इससे नाभि अपने स्थान पर वापिस आ जाएगी।   
  1. बार-बार छींक आने से “नाभि-चक्र” अपने स्थान पर आ जाता है। इसलिए छींक आने के उपाय करें।  
  1. Pet ki dharan ka ilaj करने के लिए आपको पश्चिमोत्तानासन, उत्तान-पादासन, धनुरासन, मत्स्यासन आदि आसनों का अभ्यास करना चाहिए।  
  1. यदि आप Dharan ka desi ilaj करना चाहते हैं तो दाहिने हाथ की अनामिका के  आगे का भाग नाभि केंद्र पर रखते हुए, उसी पैर का अंगूठा नाक के आगे के भाग से स्पर्श करने का प्रयास करें। और इसी स्तिथि में थोड़ी देर रुके रहें। 
  1. नाभि खिसक जाने पर मरीज को मूँगदाल की  खिचड़ी के अलावा कुछ न दें।  
  1. Dharan ka ilaj करने के लिए आपको 15 से 20  मिनट  तक वायु मुद्रा का अभ्यास करना चाहिए।  
  1. यदि आप बार बार नाभि खिसकने से परेशान हैं, तो नाभि को बिठाने के बाद पैरों के दोनों अंगुठों में काले धागे का बांध दे।  
  1. Pet ki dharan ka ilaj करने के लिए सरसों के तेल से पेट की मालिश काफी लाभकारी होती है इसमें नाभि में जहां vibration हो रही हो उसके ऊपर नीचे या Sides में केप से दबाव डालते हुए नाभि को केंद्र में लाने का प्रयास करें।  
  1. आयुर्वेदिक एक्यूप्रेशर सिद्धांत से भी Dharan ka ilaj करना आसान माना गया है क्योंकि इसमें दाहिना अंगूठा हमारे नाभि चक्र का सादृश्य भाग होता है इसलिए दाहिने अंगूठे के ऊपर वाले हिस्से पर मेथी की पट्टी बांधने मात्र से और शिशु के ऊपरी वाले जोरों पर मसाज करने से भी नाभि का खिसकना चमत्कारी रूप से ठीक हो जाता है।  

Disclaimer 

साथियों आज हमने आपको इस Blog Post के माध्यम से घर पर Dharan ka ilaj कैसे किया जाता है इसके बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की है और साथ ही Dharan ke desi ilaj के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दी है। 

इस Post का मकसद केवल आपको Dharan ka ilaj घर पर कैसे कर सकते हैं इसकी जानकारी प्रदान करना है। आरोग्यता किसी भी प्रकार से Dharan ka ilaj पूर्ण रूप से इलाज होने का दावा नहीं करता है। 

वैसे तो हमने जो Pet ki Dharan ka ilaj बताया है इससे कोई भी नुकसान नहीं होता। अगर आप कोई उपाय गलत तरीके से करते हो या आपको कोई अन्य नुकसान होता है तो उसके लिए HindiMedicines.com जिम्मेवार नहीं होगी। 

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