त्रिकोणासन की विधि, लाभ एंव सावधानियाँ

त्रिकोणासन 

त्रिकोणासन खड़े होकर किया जाने वाला आसन है। इस आसन में शरीर एक ‘त्रिकोण’ जैसा लगता

है, और त्रिकोण का अर्थ होता है त्रिभुज। इसी कारण इस आसन को त्रिकोणासन के नाम से जाना जाता है। 

त्रिकोणासन के अभ्यास से आप कमर दर्द, मोटापा, मधुमेह जैसी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। इसी के साथ बच्चों की लंबाई बढ़ाने में भी यह आसन बहुत सहायक होता है।

आगे जानते हैं त्रिकोणासन के तरीकों और फ़ायदों के बारे में-

त्रिकोणासन करने की विधि

  • सबसे पहले सीधे खड़े होकर पैर एक साथ तथा हाथ जाँघों की बगल में रखें।
  • फिर अपने पैरों  को 2-3 फुट तक फैलाएं।  
  • सांस अंदर लेते हुए बाजूओं को दोनों तरफ फै लाएँ और उन्हें कंधों तक ऊपर उठाएँ ।  

     इस बात का ध्यान रखें की बाजुयें फ़र्श के समानांतर एक सीधी रेखा में होनी चाहिए । 

  • इसके बाद सांस छोड़ते हुए बायीं तरफ़ कमर से झुकें। 
  • बिना घुटने मोड़े हाथों को कानों से लगाए रखें।
  • अंतिम स्तिथि में आपका दायाँ हाथ जमीन के समानांतर और बायाँ हाथ पैर के समांतर होना चाहिए, मगर आपकी बांह पैर पर टिकी ना हो।
  • इस स्थिति को आराम से  सामान्य श्वसन के साथ 15-20 सेकंड तक बनाए रखें। 
  • इसके पश्चात सांस लेते हुए सामान्य स्तिथि में वापिस आयें।
  • फिर इस क्रिया को दूसरे तरफ से दोहराएं।
  • यह एक चक्र पूरा हुआ आप 2-3 चक्र दोहरा सकते हैं।  

त्रिकोणासन से पहले किये जाने वाले आसन

  • कोणासन । Konasana
  • कटिचक्रासन । Katichakrasana
  • वृक्षासन । Vrikshasana

त्रिकोणासन के बाद किये जाने वाले आसन

  • वीरभद्रासन । Virbhadrasana

त्रिकोणासन के अभ्यास के दौरान याद रखने योग्य बातें

• अभ्यास के दौरान केवल कमर से झुकें। 

• अतिंम स्थिति में सामान्य श्वसन क्रिया के साथ बने रहें।  

• जितना अधिक संभव हो उतना झुकें। 

• बगल में मुड़ते समय अपने घुटनों को ना मोड़ें । 

• आसन करते समय शरीर को  आगे या पीछे की ओर न झकुाएँ। 

•अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक ना झुकें।

त्रिकोणासन के लाभ

  1. इस आसन के अभ्यास से आप कमर दर्द को काफी हद तक ठीक कर सकते हैं।
  2. त्रिकोणासन  के नियमित अभ्यास से आपकी हाइट बढ़ती है।
  3. इस आसन के रोजाना करने से Type-1 & Type-2 डायबिटीज को रोका जा सकता है।
  4. साइटिका की समस्या में इस आसन को अगर धीरे धीरे किसी विशेषज्ञ के साथ किया जाए तो साइटिका को जड़ से ठीक किया जा सकता है।
  5. यदि आपको मोटापे या पेट की अतिरिक्त चर्बी से निजात पाना है तो त्रिकोणासन का अभ्यास रोजाना करना चाहिए। क्योंकि यह आसन पूरे शरीर में अच्छा खासा खिंचाव लेकर आता है जिसके फलस्वरूप आपको अतरिक्त फैट को कम करने में काफी सहायता मिलेगी।
  6. त्रिकोणासन के अभ्यास से फेफड़ों में अधिक ऑक्सीजन पहुँचती है, तथा फेफड़ों की अच्छी एक्सरसाइज हो जाती है।
  7. यह आपके शरीर को लचीला बनाता है तथा मांसपेशियों को कठोर एंव सख्त होने से रोकता है।
  8. यदि आप कब्ज से परेशान हैं तो त्रिकोणासन का अभ्यास रोजाना करना चाहिए। क्योंकि इससे आपका पाचन तंत्र एंव उत्सर्जन तंत्र मजबूत होता है। जिससे आप कब्ज से निजात पा सकते हैं।
  9. यह आपकी छाती के आकार को बढ़ाने में काफी सहायता करता है।
  10. त्रिकोणासन का अभ्यास नसों को स्वस्थ रखता है और साथ में मानसिक संतुलन बनाये रखने में भी काफी सह्यता करता है।
  11. इससे अभ्यास द्वारा आपके पैर सुडौल एवं मजबूत बनते हैं।
  12. इस आसन का नियमित अभ्यास करने से ग्रंथियां उचित मात्रा में हॉर्मोनस का स्राव करती हैं जो धीरे धीरे आपको तनाव व चिंता से मुक्त करती हैं।
  13. त्रिकोणासन  का नियमित अभ्यास करने से आप त्वचा संबंधी समस्याओं से काफी हद तक बच सकते हैं।
  14. यह आसन आपके पेट की ग्रथियों की अच्छे से मालिश करता है जिसके फलस्वरूप ये ग्रंथियां हॉर्मोनस का स्राव सही मात्रा में करती हैं। इससे आप अपच और Acidity से बच सकते हैं।
  15. त्रिकोणासन का अभ्यास शरीर को हल्का एंव ऊर्जावान बनाता है।
  16. इस आसन के द्वारा आप अपने हिप्स को काफी मजबूत बना सकते हो तथा भविष्य में कूल्हों से संबंधित होने वाली समस्याओं से बच सकते हैं।

त्रिकोणासन की सावधानियां

  • High & low BP में इसका अभ्यास ना करें।
  • बहुत अधिक कमर दर्द एंव स्लिप डिस्क होने पर यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • गर्दन और पीठ में अधिक दर्द होने पर त्रिकोणासन का अभ्यास ना करें।
  • यदि माइग्रेन या चक्कर आने की शिकायत है तो इस आसन का अभ्यास नहीं करनी चाहिए।
  • हाइपर एसिडिटी में भी इस आसन को करने से बचे।
  • हृदय संबंधित बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति को त्रिकोणासका अभ्यास नहीं करना चाहिए।

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