स्लिप डिस्क क्या है? लक्षण, कारण, योग, उपचार एंवम परहेज़

स्लिप डिस्क क्या है? What is slip Disc in Hindi

रीढ़ की हड्डी में कशेरुकाओं (Vertebrae) को सहारा देने के लिए गद्देदार disc होती हैं जो कि उनके बीच में स्थित होती हैं और इन्ही के कारण रीढ़ की हड्डी को झटके नहीं लगते हैं और ये रीढ़ को लचीला बनाए रखती हैं।
लेकिन जब एक डिस्क क्षतिग्रस्त हो जाती है तब इसमें सूजन एंवम टूट-फूट के कारण इसका द्रव्य बाहर कि ओर निकल जाता है, जिसे हम स्लिप डिस्क ( slip disc ) कहते हैं।
वैसे तो रीढ़ की हड्डी के किसी भी हिस्से में स्लिप डिस्क हो सकती है लेकिन ज्यादातर यह कमर के नीचे के भाग को ज्यादा प्रभावित करती है।
सामान्यतः लोग सोचते हैं कि स्लिप डिस्क (slip disc) का मतलब यह है कि डिस्क अपनी जगह से फिसल जाती है और उसका स्थान बदल जाता है मगर यह बिल्कुल गलत है । क्योंकि इसमें डिस्क अपने आकार से या तो लंबी हो जाती हैं या फूल जाती हैं।
जिसके कारण डिस्क की बाहरी दीवार क्षतिग्रस्त हो जाती है, फलस्वरूप डिस्क में मौजूद द्रव्य (Nucleus Pulposus) का रिसाव रीढ़ की हड्डी या आसपास कि तंत्रिका पर हो जाता है। स्लिप डिस्क के कारण एक हाथ या पैर में सुनपन्न, झनझनाहट एंवम कमज़ोरी हो सकती है।

स्लिप डिस्क के प्रकार – Slip Disc Ke Prkar

स्लिप डिस्क के मुख्य तीन प्रकार हैं –
1. Lumbar Slip Disc

Lumbar Slip Disc रीढ़ की हड्डी के निचे के भाग में होती है, और ये डिस्क ही सबसे ज्यादा दिक्कत करती हैं क्योंकि ये Lumbar region कि डिस्क सबसे ताकतवर होती हैं और जो बलपूर्वक कार्य होते हैं, उनके लिए सबसे ज्यादा कमर के नीचे के हिस्से का प्रयोग किया जाता है।
फलस्वरूप इन्ही डिस्क पर ज्यादा दबाव पड़ता है जिसके कारण ये ज्यादा क्षतिग्रस्त होती हैं इनमे मुख्य रूप से L3-L4, L4-L5 एंवम LS-S1 कशेरुका (Vertebrae) के बीच कि डिस्क आती हैं।
इन डिस्क के क्षतिग्रस्त होने से रोगी को कमर के निचले हिस्से, कूल्हे, जांघ, गुदा या जननांग क्षेत्र में दर्द का अनुभव होता है और ये दर्द एक पैर या दोनों पैरों कि अंगुलियों तक भी जा सकता है जिसे हम sciatica pain भी कहते हैं।

2. Thoracic Slip Disc

Thoracic Slip Disc रीढ़ की हड्डी के मध्य भाग पर दबाव पड़ने से होती हैं। सामान्यतः रीढ़ के बिचले हिस्से में स्लिप डिस्क कि संभावना बहुत कम होती हैं। ये तब हो सकता है जब कोई दुर्घटना का शिकार हुआ हो या किसी अन्य प्रकार कि चोट आदि । Thoracic Slip Disc में t1-t12 कशेरुका (Vertebrae) के बीच कि डिस्क प्रभावित होती हैं।

3. Cervical Slip Disc

Cervical Slip Disc रीढ़ की हड्डी के गर्दन वाले भाग में होती है। यह ज्यादातर गर्दन के आगे कि ओर झुकाए रखने कि वजह से होती है । इसमें c5-c6 एंवम c6-c7 कशेरुका (Vertebrae) के बीच कि डिस्क प्रभावित होती हैं जिसके कारण रोगी के सिर के पिछले भाग, गर्दन वाले भाग, कंधे से लेकर बांह और पूरे हाथ में दर्द हो सकता है।

स्लिप डिस्क के लक्षण – Slipped Disc Symptoms in Hindi

वैसे तो आपको रीढ़ की हड्डी के किसी भी हिस्से में स्लिप डिस्क ( slip disc ) हो सकती है गर्दन, कमर के बिचले हिस्से एंवम कमर के निचले हिस्से में, लेकिन पीठ के निचले हिस्से में यह समस्या सबसे ज्यादा होती है।
अगर हम देखे तो रीढ़ की हड्डी, तंत्रिकाओं (Nerves) और रक्त वाहिकाओं (Blood vessels) का एक उलझा हुआ (Complicated) तंत्र होता है। स्लिप डिस्क में ये डिस्क, तंत्रिकाओं के ऊपर दबाव डालती हैं जिसके कारण आपके हाथों पैरों एंवम शरीर के अन्य हिस्सों में पीड़ा हो सकती है।

1. हाथों एंवम पैरों में दर्द

स्लिप डिस्क होने के कारण जो तंत्रिकायें हाथों एंवम पैरों कि ओर निकलती हैं उनके ऊपर दबाव पड़ता है, जिसके कारण आपके हाथों एंवम पैरों में दर्द महसूस होता है यह दर्द कम भी हो सकता है एंवम बहुत ज्यादा भी ये आपकि स्तिथि पर निर्भर करता है ।

2. बैठते एंवम खड़े होते समय दर्द का बढ़ना

यदि आप अपनी स्तिथि बदलते हैं जैसे कि बैठना एंवम खड़ा होना, अगर आपको इन गतिविधियों में कमर या गर्दन में कहीं भी दर्द का अनुभव होता है या दर्द ज्यादा बढ़ता है तो आपको सचेत होने कि आवश्यकता है क्योंकि यह स्लिप डिस्क का आम लक्षण है।

3.चलते वक्त दर्द होना

यदि आप थोड़ा चलते हैं उस वक्त यदि आपको दर्द का अनुभव होता है तो यह भी स्लिप डिस्क का प्रमुख लक्षण है। इसलिए आप इस लक्षण को देखकर अनदेखा ना करें और अच्छे से चिकित्सक के पास अपनी जांच करवाएं ताकि सटीक कारण का पता लग सके और उसका उचित उपचार हो सके ।

4.रात के समय दर्द बढ़ना

यदि आप स्लिप डिस्क से पीड़ित व्यक्ति हो तो रात के समय ये दर्द अचानक से ज्यादा बढ़ जाता है। अधिकतर लोगों को तो रात को सोने में भी परेशानी होती है। कई बार तो रोगी सोचता है कि किस स्तिथि में सौऊ और यह स्तिथि रोगी के लिए बहुत भयानक होती है । अगर आपको इस प्रकार कि समस्या है तो आपको तुरंत चिकित्सा सहायता कि जरूरत है ।

5. झुनझुनी, दर्द एंवम जलन महसूस होना

यदि आपको किसी प्रभावित क्षेत्र में झुनझुनी, दर्द एंवम जलन महसूस होती है तो ये स्लिप डिस्क का लक्षण हो सकता है क्योंकि स्लिप डिस्क के कारण आपकि तंत्रिकाओ पर दबाव पड़ता है जिससे आपको इस प्रकार कि स्वेदनाएं महसूस होती हैं।
इसलिए आप अपने चिकित्सक से सलाह लें और दर्द के कारण का पता लगाएं क्योंकि इस प्रकार के दर्द रीढ़ से जुड़े कई अन्य कारण भी होतें हैं।

6. मांसपेशियों में कमज़ोरी

स्लिप डिस्क के दौरान आपकी मांसपेशियों में भी कमजोरी आ जाती है जिसके कारण मांसपेशियों में भी दर्द का अनुभव होता है इसलिए एस प्रकार के लक्षणों को अनदेखा ना करें और चिकित्सक से परामर्श लें ।

स्लिप डिस्क के कारण – Slipped Disc ke karan

स्लिप डिस्क के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:-

1.डिस्क का धीरे-धीरे कमजोर होना

जैसे जैसे हमारी उम्र बढ़ती जाती है वैसे वैसे हमारी रीढ़ के अंदर जो डिस्क होती है वो भी क्षरण (नष्ट होना ) होती जाती हैं क्योंकि ये डिस्क हमारे शरीर का ज्यादातर वजन या भार सहन करती हैं और ये अलग-अलग गतिविधियों में लगने वाले झटकों से हमें बचाती हैं। इसीलिए समय के साथ डिस्क या तो सूखने लग जाती है या उनकि बाहरी कठोर परत कमज़ोर होने लगती है जिसके कारण डिस्क में उभार आ जाता है, जिसे हम स्लिप डिस्क कहते हैं।

2.शारीरिक स्तिथि खराब होना

आजकल के भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने ऊपर ध्यान देना भूल ही गये हैं। रोजमर्रा के कार्यों में वे लोग ये भूल जाते हैं कि उनके स्वास्थ्य के लिए क्या जरूरी है?
इसलिए लोग कार्य करते वक्त रीढ़ कि हड्डी कि सही स्तिथि क्या होनी चाहिए इसको ध्यान मे ना रख कर कमर एंवम गर्दन को जरूरत से ज्यादा झूका कर काम करते रहते हैं, यही गतिविधि निरंतर चलती रहती है।
जिसके फलस्वरूप उनकी रीढ़ में जो डिस्क होती हैं उनके ऊपर अतिरिक्त दबाव पड़ता है जिसके कारण लोग स्लिप डिस्क का शिकार बन जाते हैं। इसी कारण युवा लोग भी आजकल इसका शिकार बन रहे हैं।

3.दुर्घटना का शिकार एंवम कोई चोट लगना

यदि कोई इंसान सड़क हादसे का शिकार हो गया हो जिसके कारण उसे पीठ में गंभीर चोट या किसी प्रकार का झटका लगा हो जिससे उसकी डिस्क को कोई क्षति पहुंची हो, इस कारण से भी लोग स्लिप डिस्क का शिकार हो सकते हैं।
इसी के साथ अगर किसी को खेल के दौरान रीढ़ कि हड्डी में किसी प्रकार कि चोट या झटका लगा हो तो भी स्लिप डिस्क हो सकती है। और किसी भारी वस्तु एंवम सामान को ग़लत तरीके से उठाने के कारण भी आपकी डिस्क पर असामान्य दबाव पड़ता है जिसके कारण आपको स्लिप डिस्क हो सकती है।

स्लिप डिस्क का इलाज कैसे होता हैं – Slip Disc Ka Ilaj

1. शुरुआत में चिकित्सक आपकी जांच करता है और उसके बाद आपकि रिपोर्ट के अनुसार आपको दवाइयाँ देता है। दवाइयों के द्वारा आपका उपचार 45-60 दिन तक चलता है, और आप दवाइयों से भी सही हो सकते हैं।
2. दवाइयों के साथ-साथ आपका चिकित्सक कुछ ऐसे व्यायाम बताता है जो आपकि स्लिप डिस्क के लिए लाभदायक होते हैं। इस प्रकार चिकित्सक द्वारा बताए गए व्यायामों को नियमित रूप से करके भी आप सही हो सकते हैं।
3. पहले तो डॉक्टर आपको दर्द निवारक गोलियां देता है अगर ये गोलियां आपके ऊपर बेअसर हैं फिर उसके बाद आपका डॉक्टर आपको मांसपेशियों के ऐंठन एंवम तंत्रिका तंत्र के दर्द को राहत देने वाली दवाएं देता है। हालांकि इनका लंबे समय तक उपयोग करना हानिकारक होता है।
4. अगर चिकित्सक द्वारा इन उपचारों के द्वारा आपको कोई फायदा नहीं होता है तो अंत में आपको सर्जरी करवाने कि सलाह दी जाती है जो कि एक चिकित्सक के पास आखिरी विकल्प होता है। आप सर्जरी तभी करवाएं जब सब कुछ बेअसर हो जाये एंवम बहुत ज्यादा आपात कि स्तिथि हो।
5. फिओथेरपिस्ट के पास जाएं जिससे वो आपकी स्तिथि को जांच कर उचित व्यायाम करवाता है। इस उपचार से भी आप स्लिप डिस्क में काफी राहत पा सकते हैं।
6. योग का अभ्यास करना भी आपको स्लिप डिस्क में बहुत फायदा करता है। योग के द्वारा बिना सर्जरी के आप स्लिप डिस्क से छुटकारा पा सकते हैं।
7. आयुर्वेद में ऐसी कई उपचार विधियाँ हैं जो आपको स्लिप डिस्क से निजात दिला सकती हैं जैसे कि – पंचकर्म और विभिन्न प्रकार कि औषधियाँ।
8. प्राकृतिक चिकित्सा भी स्लिप डिस्क का बिना ऑपरेशन अच्छा इलाज है जिसमें आपको विभिन्न प्रकार के उपचार दिए जाते हैं जैसे कि – मिट्टी कि पट्टी , भांप चिकित्सा, जल चिकित्सा , औषधीय तेलों द्वारा मालिश करना एंवम उपवास आदि।
9. Accupressure और Accupenture चिकित्सा भी स्लिप डिस्क में बहुत लाभदायक होती है जिनमे आपके शरीर के विशेष बिन्दुओ पर दबाव एंवम Accupenture niddle लगाकर चिकित्सा कि जाती है।
10. होमीओपैथी चिकित्सा पद्धति भी बिना ऑपरेशन के स्लिप डिस्क का उपचार करती हैं । इस चिकित्सा में आपको किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होता है। यह विधि उपचार में थोड़ा लंबा समय लेती हैं मगर फायदेमंद होती हैं।

स्लिप डिस्क के लिए योगाभ्यास – Slip Disc Ke Liye Yoga

1. स्लिप डिस्क के रोगियों के लिए भुजुंगासन सबसे अच्छा साबित हुआ है।
2. मर्कटासन के सभी अभ्यास स्लिप डिस्क के गंभीर से गंभीर रोगी को सही कर सकते हैं।
3. मकरासन का अभ्यास आपकी संपूर्ण रीढ़ कि हड्डी के लिए वरदान का कार्य करता है।
4. उष्ट्रासन भी स्लिप डिस्क में बहुत फायदेमंद है।
5. सेतुबंध आसान स्लिप डिस्क के रोगियों के लिए रामबाण औषधि जैसा काम करता है।
6. कमर के निचले हिस्से में दर्द के लिए सलभासन बहुत बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ है।
7. पवनमुक्तासन भी आपके लिए बहुत सहायक है ।
8. प्राणायामों का अभ्यास भी स्लिप डिस्क में काफी लाभदायक होता है। इससे आपके रक्त कि शुद्धि होती है तथा आपके शरीर कि सभी नाड़ियाँ शुद्ध हो जाती हैं। जैसे कि अनुलोम – विलोम ( नाड़ीशोधन प्राणायाम )।

स्लिप डिस्क में क्या न करें – Slip Disc Me Parhej

स्लिप डिस्क के परहेज इस प्रकार हैं :-

• यदि आप स्लिप डिस्क से पीड़ित हैं तो इस स्तिथि में आप अत्यधिक आराम ना करें और ना ही ज्यादा शारीरिक गतिविधि करें।
• इस स्तिथि में आप लंबे समय तक खड़े ना रहें और ना ही अधिक समय तक एक ही स्तिथि में बैठे रहें, क्योंकि इससे आपकी रीढ़ की हड्डी पर तनाव बढ़ेगा और आपका दर्द बढ़ जाएगा।
• ऐसी कोई भी गतिविधि ना करें जो आपके पीठ दर्द को को बढ़ा सकती है।
• स्लिप डिस्क कि स्तिथि में आप आगे कि ओर ज्यादा ना झुके।
• पीठ दर्द में आपको अधिक वजन नहीं उठाना चाहिए क्योंकि यह आपकि पीड़ा को और अधिक बढ़ा सकता है।
• स्लिप डिस्क के दौरान आपको भागदौड़ एंवम खेलकूद से बचना चाहिए क्योंकि इससे आपकि स्तिथि और गंभीर हो सकती है ।
यदि आप स्लिप डिस्क से पीड़ित हैं तो मेरे दोस्त आप मानसिक रूप से ज्यादा परेशान ना हों क्योंकि तनाव एंवम चिंता दर्द को और अधिक बढाती है।

स्लिप डिस्क से बचने के उपाय – Slip Disc ke Upay

1. रोजाना व्यायाम एंवम योग अभ्यास करें।
2. जब आप कोई भारी समान उठाते हैं तब सही तरीका अपनाएं। जिससे आप असामान्य दबाव से बचेंगें ।
3. अपने शरीर का वज़न नियंत्रित बनाये रखें, जिससे आपकी कमर के नीचे के भाग पर दबाव कम पड़ेगा और डिस्क को नुकसान नहीं होगा।
4. केवल झुकने एंवम टेढ़ा बैठने से ही स्लिप डिस्क नहीं होता, यदि आपको रीढ़ कि हड्डी में कहीं पर चोट लगी है तो गलत तरीके से बैठने से स्लिप डिस्क हो सकती है। इसलिए आपको चोट लगी है तो थोड़ी सावधानी बरतें ।
5. यदि आप ज्यादा बैठे रहने वाला काम करते हैं तो अपनी पीठ और कुर्सी के बीच एक छोटा तकिया या तौलिये को गोल करके रखें। जिससे आप पीठ पर पड़ने वाले असामान्य दबाव से बचेंगें ।
6.अत्यधिक धूम्रपान करना छोड़े क्योंकि निकोटीन आपकी रीढ़ कि हड्डी में जो डिस्क होती हैं उनको नुकसान पहुंचा सकता है, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यह डिस्क के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को अवशोषित कर उनकी क्षमता को कम करता है।
जिसके फलस्वरूप आपकि डिस्क सूख सकती और आप कमर दर्द का शिकार हो सकते हैं।
7.जब चलते फिरते हैं तब ध्यान रखें कि आपकि रीढ़ कि हड्डी सीधी हो ताकि आपकि रीढ़ कि स्तिथि सही रहे जिससे आपकि डिस्क पर असामान्य दबाव नहीं पड़ेगा ।
8.सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप सोते कैसे बिस्तर पर हैं इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि आपका बिस्तर ज्यादा मुलायम ना हो एंवम पलंग ज्यादा ढीला ना हो । क्योंकि निरंतर ऐसी स्तिथि आगे कमर दर्द या स्लिप डिस्क का कारण बन सकती है ।

Best Diet For Slip Disc In Hindi

  • आपकी vertebra कशेरुकाओं को मजबूत एंवम स्वस्थ बनाए रखने के लिए अपने दैनिक आहार में पर्याप्त कैल्शियम लें। 1gm कैल्शियम आपको प्रतिदिन ग्रहण करना चाहिए।
  • अपने आहार में ताजा हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजा फल एंवम उच्च प्रोटीन वाली खाद्य सामग्रियों को शामिल करें जैसे कि अंडे, चिकन एंवम मछलियाँ आदि.
  • विटामिन c, d, e एंवम k से युक्त आहार का सेवन करें। विटामिन d के लिए आप धूप भी ले सकते हैं। विटामिन d के बिना कैल्शियम का पाचन नहीं हो सकता।
  • यदि आपको भोजन से पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल रहें हैं तो मल्टीवाइटमीन (multivitamin) भी एक अच्छा विकल्प है। जिसे आप दैनिक जीवन में सम्मिलित कर सकते हैं।
  • स्लिप डिस्क से पीड़ित व्यक्ति को पानी अधिक पीना चाहिए क्योंकि पानी कि कमी से आपकि डिस्क सुख सकती हैं जो दर्द का कारण बनती हैं। और इसी कारण डिस्क तक पोषक तत्व भी नहीं पहुँच पाते । ज्यादा ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए और विशेष रूप से सर्दियों में आपको गरम पानी का सेवन करना चाहिए ।
  • Aloevera ( ग्वार पठ ) के जूस का 20 ml सुबह -शाम खाली पेट सेवन करना चाहिए जो कि आपके पाचन तंत्र को मजबूत करता है एंवम आपके दर्द को राहत प्रदान करता है ।

स्लिप डिस्क से किसको ज्यादा खतरा है?

• जिन लोगों कि उम्र 37 से 60 वर्षों के बीच होती है उन्हें स्लिप डिस्क होने की संभावनाएं अधिक होती हैं। बाकी आजकल खानपान एंवम आदतों कि वजह से युवा भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
• यदि आपके माता – पिता को स्लिप डिस्क है तो आपको भी अनुवांशिक कारणों कि वजह से स्लिप डिस्क हो सकती है।
• पुरुषों को महिलाओं से स्लिप डिस्क होने का जोखिम लगभग दुगना होता है।
• जिन कार्यों में शारीरिक ऊर्जा की अधिक जरूरत होती है, उन लोगों को स्लिप डिस्क होने का खतरा अधिक होता है।

• यदि आपका वजन अधिक है तो ये आपकि पीठ के निचले हिस्से कि डिस्क पर असामान्य तनाव का कारण बनता है और आपके लिए जोखिम बड़ा देता है।

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