दूध के नुकसान | Side-Effects of Milk in Hindi

आज के इस लेख में हम आपको दूध के नुकसान ( Side effects of milk in hindi ) के बारे में बताएंगे। क्योंकि आज तक सभी लोग दूध के फ़ायदों के बारे में ही जिक्र करते हैं। इसलिए आपको दूध के फ़ायदों के साथ-साथ दूध के क्या – क्या नुकसान ( Side effects of milk in hindi ) हो सकते हैं ये भी जानना बहुत महत्वपूर्ण है।

वैसे तो दूध के बारे में बहुत सी मान्यताएं फैली हुई है। दूध के ऊपर काफी शोध हुए और अभी भी कई अनुसंधान केंद्रों के वैज्ञानिक इसके ऊपर अनुसंधान कर रहे हैं । इनमें पाया गया की दूध में कैल्शियम, प्रोटीन तथा अन्य काफी पौषक तत्व पाए जाते हैं। मगर आज हम आपको दूध के बारे में कुछ अलग जानकारी प्रदान करेंगें।

पशुओं का दूध नुकसान क्यों करता है? Why the animal milk is harmful in hindi?

Animal Milk हमे नुकसान इसलिए करता है क्योंकि जो दूध ईश्वर ने दिया है वह केवल उसी के बच्चे के लिए होता है। मगर उस दूध को हम ग्रहण करते हैं जिससे वास्तव में हमें किसी प्रकार का फायदा नहीं होता है। मनुष्य तो पशुओं के बच्चों का दूध केवल अपने स्वार्थ के लिए उपयोग करता है, जिसके फलस्वरूप वे अनेक बीमारियों को आमंत्रित करता है।

आपने ऐसा अक्सर देखा होगा की जब हम गाय व भैंस को दुहने जाते है तब वे हमें आसानी से दूध नहीं देती हैं, जब हम उनके बच्चे को छोड़ते हैं, तब पशु अपने बच्चे का पेट भरने के लिए दूध छोड़ने लगता है। फिर हम पशु के बच्चे को दूध नहीं पीने देते तथा उसे पकड़ कर एक तरफ खूटे से बांध देते हैं।

ऐसा करने से बेजुबान प्राणी तथा उसका बच्चा तड़पता रहता है, और जब हम उसके हिस्से का दूध निकालते हैं। तब वह काफी बार पैर पटक-पटककर मना करती है लेकिन मनुष्य उसके पैरों को बांधकर भी दूध निकाल लेता है।

इस प्रकार हम कुदरत के नियमों को तोड़कर पशुओं के दूध को हम अपने बच्चों को पिलाते हैं। कई बार आपने देखा होगा कि छोटे बच्चे इन पशुओं के दूध को पीने से इन्कार करते हैं। तब मां बच्चे का हाथ-पैर पकड़ कर दूध पिलाती है और इस काम को बड़ा साहस का कार्य मानकर आनंद महसूस करती है।

बच्चों को कैसा दूध पीना चाहिए?- Which is the best milk for children in hindi?

परमात्मा हर माता को उनके बच्चों के लिए दूध देते हैं। लेकिन आजकल की स्त्रियाँ शरीर फीका पड़ जाने का बहाना बनाकर अपना दूध अपने बच्चों को नहीं पिलातीं। जिसके फलस्वरूप बच्चा दूध के लिए रोने लगता है, और बच्चे की मां उसे गाय या भैंस का दूध पिलाने का प्रयास करती है।

मजबूरीवस बच्चा अपनी भूख मिटने के लिए धीरे-धीरे ये दूध पीने लगता है और फिर उस दूध की उसे आदत पड़ जाती है।

पशुओं का दूध हानिकारक कैसे है? How the animal milk is harmful in hindi?

  • जब गाय व भैंस के दूध से बनी मिठाई लोग खाते हैं, तब उससे गैस, कफ, तथा पित्त की समस्या होती है।
  • वर्तमान चिकित्सा विज्ञान दवाई और दूध द्वारा बीमारी दूर करने का प्रयास करता है। लेकिन मनुष्य दवाई और दूध से असाध्य बीमारी का शिकार बन जाता है। हम आज कल देखते हैं कि 30 से 35 वर्ष का व्यक्ति भी हृदय रोग से ग्रसित हो जाता है।
  • हम छोटे बच्चों को बाहर से, पानी, कीटनाशक रासायनिक छिड़काव वाली सब्जी, अनाज, फल नहीं देते हैं, फिर भी उन बच्चों को बार-बार बुखार, सर्दी, खांसी, फोड़े, हृदय की धड़कनें बढ़ जाना जैसी कई बीमारियां होती हैं। इन सभी बीमारियों का कारण केवल पशुओं के दूध का उपयोग है। क्योंकि मनुष्य शरीर उस दूध को पचा नहीं पाता है।

वर्तमान समय में हम देखते हैं कि दिन-प्रतिदिन जनसंख्या बढ़ती जा रही है। वहीं दूसरी ओर पशुओं की संख्या कम होती जा रही है। लेकिन प्रत्येक मनुष्य जन्म से लेकर मृत्यु तक दूध और दूध से बनी हुई बहुत सारी वस्तुओं का भरपूर मात्रा में उपभोग करता है।

क्या आपने कभी सोचा है की इतना दूध कहां से आता है?

जब आप डेरी में दूध लेने जाते हैं तो दुकानदार आप से पूछता है की आपको कितने रूपयों वाला दूध चाहिए? ऐसा इसलिए क्योंकि मार्केट में दूध अलग-अलग प्रकार के होते हैं।

पहले प्रकार का दूध

पहला दूध है, सिन्थेटिक दूध। इस दूध को केमिकल से बनाया जाता है।

इसमें बर्फ डालकर हमारे घरों तक पहुंचाया जाता है। अतः यह दूध आपके लिए हानिकारक होता है।

दूसरा दूध – डेरी का दूध

यह बात आप अच्छे से जानते हैं कि प्राणी सीधे-सीधे दूध नहीं देते, मगर जब उनका बछड़ा थनपान करता है, तब जाकर पशु दूध छोड़ते हैं।

लेकिन ऐसा अक्सर नहीं होता है, क्योंकि गौशाला में बहुत सी गाय, भैंस ऐसी हैं जिनको केमिकल वाला इन्जेक्शन देकर उनका दूध मशीन लगाकर खींच लिया जाता है। ऐसे दूध के साथ केमिकल तथा पशु का खून भी खिंच जाता है। वह दूध हम तक पहुंचता है। उससे बनने वाली वस्तुएं काफी हानिकारक हैं।

तीसरा दूध – पश्च्युराइज्ड दूध

तीसरी प्रकार का दूध मार्केट में बहुत ही प्रचलित है। इस दूध को सबसे पहले गांवों की बड़ी डेरी से एकत्रित किया जाता है। वहां पर सम्पूर्ण दूध की मलाई निकाल ली जाती है। उस मलाई से मक्खन और घी बनाया जाता हैं। बचा मलाई निकाला हुआ दूध पतला हो जाता है।

उसमें अलग-अलग फैट के अनुसार पाउडर मिक्स कर उसे बहुत ही ऊँचे उष्ण तापमान पर गर्म कर तुरन्त ही ठण्डा कर प्रिजर्वेटिव का उपयोग कर, मशीनों द्वारा प्लास्टिक की अलग-अलग थैली में पैक कर हम तक पहुंचाया जाता है। यह दूध मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक होता है।

चौथा दूध गाय का है

यह मान्यता सभी जगह है की गाय एक पवित्र पशु है। उसमें 33 करोड़ देवताओं का निवास है। हम गाय को माता के रूप में भी पूजते हैं, किन्तु लोग सुबह गाय का दूध निकालकर खुली छोड़ देते हैं। जो हमारे घर की जूठन, गलियों में छोटे बच्चों की संडास तथा गंदगी-कूड़ा आदि खाती है। जैसा आहार वैसा दूध।

अतः उसका दूध भी गंदगी वाला ही होगा और शाम को दुहकर वह हम तक पहुंचता है। अतः यह दूध भी हानिकारक होता है।

इस प्रकार यह चार प्रकार का दूध पीने योग्य नहीं होता है।

कुछ लोग तर्क देते हैं कि हम गाय-भैंस को अच्छी खुराक देते हैं। हमारी नजरों के सामने कोई गंदगी खाने नहीं देते। तो उस दूध का उपयोग करने में क्या समस्या? तब मुझे ऐसे लोगों को इतना ही कहना है कि बड़े आश्रम/ मन्दिर में स्वयं की गौशाला होती है।

इस गौशाला में गाय भैंस को अच्छा पौष्टिक आहार देते हैं। वह प्रतिदिन नहलाई जाती है। उसका स्थान स्वच्छ रखा जाता है। इस गाय-भैंस को दुहने में बहुत ही सावधानी बरती जाती है।

वह दूध आश्रम, मन्दिर में रहने वाले साधु, संत उपयोग करते हैं। अतः साधु, संत तो स्वस्थ होने चाहिए। किन्तु वे भी भयंकर बीमारी का शिकार बनते हैं। अकाल मृत्यु होती है। तो इससे यह सिद्ध होता है की पशु का दूध मनुष्य के लिए उपयोगी नहीं होता।

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