दलिया खाने के फायदे एंव इसके प्रकार

गुणकारी दलिया का परिचय

दलिया शब्द दलने से बना है, जिसका अर्थ दबाने से टूटा हुआ अन्न। इस प्रकार के अन्न में पोषक तत्व जलने से बच जाते हैं।

इसमें उच्च मात्रा में प्रोटीन, आयरन और फाइबर पाया जाता है।

तथा अन्न कण मोटा होता है, अतः इसे चावल की तरह बनाया जाता है।

इस पौष्टिक आहार का नाम सभी जानते हैं, शायद ही कोई घर ऐसा हो, जो इसके नाम से परिचित न हो। परन्तु इसमें क्या क्या गुण हैं, एवं इसका प्रयोग हम अपने नित्य जीवन में कैसे कर सकते हैं, यह बहुत ही कम लोग जानते हैं।

प्रकृति ने हमारे शारीरिक पोषण के लिए जो भी खाद्य पदार्थ बनाये हैं, वह सभी परिपक्व हैं, परन्तु फिर भी हम अनेक खाद्य पदार्थों को भूनकर एवं पकाकर खाते हैं।

पुराने समय भोजन पकाने की प्रथा नहीं थी, तब उस वस्तु को उसी रूप में ग्रहण किया जाता था, परिश्रम भी कम करना पड़ता था और शरीर को पोषण भी अधिक मिलता था और तब शायद ही कोई बीमार पड़ता था। फिर भी वर्तमान समय में भोजन बनाने एवं भोजन करने की प्रथाओं में थोड़ा सा परिवर्तन कर लिया जाय, तो उस वस्तु से पोषण भी अधिक प्राप्त होगा और पैसे की भी बचत होगी।

जैसे हम गेंहू को ही लें। गेहूं का प्रयोग हमारे देश में कई प्रकार से किया जाता है परन्तु इसका सबसे सरल तरीका दलिया बनाकर खाने से है। इससे गेहूं में पाए जाने वाले पोषक तत्व अधिक मिलते हैं तथा स्वाद और सेहत के नजरिए से भी दलिया अति उत्तम होता है।

दलिया के प्रकार और दलिया खाने के फायदे

दलिया एक दलीय सभी अनाजों का जैसे गेहूं का दलिया, जौ का दलिया, ज्वार का दलिया, मक्का का दलिया बनाया जा सकता है। विभिन्न प्रकार के दलिया बनाने की विधि नीचे दी जा रही है।

गेहूं का दलिया

गेहूं को साफ एंव पानी में धोने के बाद धूप में सुखाये। उसके बाद गेहूं को चक्की से दलकर 4-5 टुकड़े कर लें। 4-5 टुकड़े से अधिक न हों एवं ज्यादा बारीक ना करें। यदि महीन हो जाय तो आटे की चलनी से छानकर आटा एवं बड़े-बड़े टुकड़े (दलिया) अलग कर लें। आटे को रोटी के रूप एवं बड़े-बड़े टुकड़ों को दलिया के रूप में प्रयोग में लायें।

 

1. गेहूं का दलिया 50 ग्राम, गाजर-मटर-पत्तागोभी-आलू सभी 400 ग्राम, धोकर काटकर घी, हींग, जीरा, हल्दी से छौंककर ऊपर से 300 ग्राम (6 गुना) पानी डालकर (स्वादनुसार नमक भी डालें) धीमी आंच पर पकायें। ऊपर से अदरक, धनिया, नींबू डालकर खायें।

अंकुरित गेंहू का दलिया

गेहूं को 12 घंटे पानी में भिगोकर, भीगे हुए गेंहू को एक कपड़े में बांधकर 12 घण्टे रख दें। उसमें अंकुर निकल आने पर कपड़े के ऊपर बिछाकार धूप में सुखाकर, चक्की में उपरोक्त बताई विधि से दलकर दलिया तैयार कर लें।

अंकुरित गेहूं का दलिया 50 ग्राम, पालक, मेथी, बथुआ, लाल साग, खट्टा साग आदि जो भी उपलब्ध हो 400 ग्राम धोकर घी, हींग, जीरा, अदरक, हल्दी के साथ छौंक कर स्वादानुसार नमक व 300 ग्राम पानी डालकर पकायें। बाद में धनिया पोदीना अदरक चटनी से खायें।

सावधानी

अंकुरित करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि गेहूं में बदबू न आने पाये यह तभी होगा जब गेहूं को बराबर धूप में रखा जाय। बरसात के दिनों में गेहूं खराब हो जाता है। अत: गेहूं को धूप दिखाते रहना चाहिए।

एक बार तैयार किया गया दलिया एक सप्ताह के अन्दर ही उपयोग में लाइये। अधिक समय तक रखने से उसके पोषक तत्व कम हो जाते हैं।

जौ का दलिया

जौ को 24 घण्टे पानी में भिगो दीजिए। जब पानी सूख जाए तब उसकी भूसी निकालकर धूप में सुखाकर चक्की में दलकर दलिया तैयार कर लें। इसी प्रकार मक्का, ज्वार को साफ करके चक्की में दलकर दलिया तैयार कर सकते हैं।

जौ का दलिया बनाने की विधि

जौ का दलिया 50 ग्राम, पानी 100 ग्राम, पक जाने पर 100 ग्राम दही मिलाकर खायें। नींबू, टमाटर, अदरक भी मिला सकते हैं।

जौ के दलिये के फायदे

  • मधुमेह के रोगियों को जौ का दलिया, लस्सी में मिलाकर खिलना चाहिए। यह उनके लिए काफी लाभकारी होगा।
  • जौ के दलिये में विटामिन बी,कैल्शियम,मैग्नीशियम तथा पोटेशियम जैसे पौषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।
  • इसके निरंतर सेवन करने से आपके शरीर में जमी अतिरिक्त वसा धीरे-2 कम होने लगती है।
  • जौ का दलिया खाने से हृदय रोग तथा टी.बी. जैसे गंभीर रोगों में काफी लाभ मिलता है।
  • इसका निरंतर सेवन कमजोर बच्चों के सेहत के लिए काफी उपयोगी सिद्ध हुआ है।
  • जौ के दलिए से चक्कर आना, दिल घबराना तथा कमजोरी जैसी समस्याएं दूर होती है |

ज्वार का दलिया

ज्वार को चक्की में दलें। एक दाने के दो तीन टुकड़ें हो, गरम पानी में उबालें। दूध के साथ भी उबाल सकते हैं। गुड़, मेवा आदि भी डालकर खा सकते हैं। इसी प्रकार, मक्का का दलिया बना सकते हैं।

सब्जी-दाल वाली दलिया

मिक्स दाल एवं अंकुरित अन्न का दलिया बराबर मात्रा में लेकर 4 गुना सब्जी (जो भी उपलब्ध हों) एवं 4 गुना पानी के साथ उपरोक्त विधि से बनावें।

गेहूं का दलिया 50 ग्राम, पानी 350 ग्राम, पत्तागोभी 100 ग्राम, लौकी 100 ग्राम, टिण्डा, परवल 50 ग्राम तोरी, आलू, कद्दू आदि 400 ग्राम धो काटकर पकायें। टमाटर/ नींबू, अदरक, हरा धनिया मिलाकर पकायें।

विटामिनयुक्त दलिया

अंकुरित गेहूं का दलिया 100 ग्राम, गेहूं के आटे का चोकर 25 ग्राम, पालक 100 ग्राम, गाजर 50 ग्राम, बन्दगोभी 50 ग्राम, काला तिल 10 ग्राम, मूंगफली 10 ग्राम, किशमिश 10 ग्राम सबको पकाकर, पक जाने पर कच्चा टमाटर 100 ग्राम, छोटा छोटा काटकर मिला दें। हरा धनिया, मूली कच्ची मिला दीजिए। चबाकर खाइए।

दलिया खाने के फायदे

दलिया में अनाज के सभी तत्व मौजूद रहते हैं। विटामिन बी. भरपूर रहता है। पचने में हल्का होता है। शौच साफ लाता है। कफ कम बनता है। दमा, खांसी में कुछ दिनों तक केवल

दलिया, सब्जी, फल खाकर रहने से अत्यन्त लाभ होता है। अपने दैनिक भोजन में चावल की जगह दलिया खाना उत्तम है।

1. दमा, मासिक धर्म की कमी या अधिकता में, गर्भपात या सन्तान न होना हृदय की बीमारी में पालक व सब्जी वाली दलिया बनायें।

2. कैल्शियम की कमी होने पर 10 ग्रा. काला तिल कूटकर किशमिश मिलाकर खायें।

3. कमजोर बच्चे को दूध वाले दलिया में गाय का दूध, छुआरा, गोलागिरी, दो बादाम, किशमिश मिलाकर खिलाएं।

4. जिनकी आतें कमजोर हों उन्हें दही/मट्ठा के साथ दलिया खाना चाहिए।

 

दलिये को सुरक्षित कैसे रखे?

1.एक बार का तैयार किया गया दलिया एक सप्ताह के अन्दर ही उपयोग कर लें। इसके बाद उसमें कीड़े पड़ जाने का भय रहता है।

2. जब भी दलिया बनावें, एक बार उसे फिर दुबारा देख लें। कहीं उसमें कोई गंदगी न रह गई हो।

3. दलिया पीतल, स्टील, एवं कलईदार बर्तनों में ही बनायें, तांबा, एल्यूमिनियम के बर्तनों में बनाने से पोषक तत्व कम हो जाते हैं।

4. दलिया धीमी-धीमी आंच में ही पकायें। अधिक तेज आंच में पोषक तत्व उड़ या जल जाते हैं। पकाते समय ऊपर से ढक दें, इससे दलिया के सभी पोषक तत्व अन्दर ही बने रहेंगे।

5. दलिया बनाकर उसी बर्तन में या दूसरे बर्तनों में स्टील, पीतल या कलईदार बर्तनों में रखें। प्लास्टिक या एल्युमिनियम आदि बर्तनों में न रखें।

 

दलिया कब खाना चाहिए ?

यदि आप दलिये को सुबह के समय नाश्ते में लेते हैं तो यह आपको सम्पूर्ण पौषण प्रदान करेगा। जिससे आपका वजन नियंत्रित रहेगा। इसे ज्यादातर सुबह इसलिए कहते हैं, क्योंकि इससे शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिलती है जिससे की आप दिनभर तरो-ताजा रहते हैं। 

वैसे तो आप दलिए को दिन में कभी भी खा सकते हैं। यदि आप दलिया रात के खाने में शामिल करते हैं तो ये आपको अच्छी तथा गहरी नींद भी प्रदान करता है क्योंकि इसमें जो फाइबर और पानी होता है वह आपको जल्दी से भूख नहीं लगने देता है। .

दलिया कैसे खाएं ?

पके हुये दलिये में कार्बोहाइड्रेट होता है और कार्बोहाइड्रेट का पाचन मुंह की लार में होता है। अत: दलिया को जितना चबाकर खाया जायेगा, उतना ही लाभ अधिक मिलेगा तथा पाचन शीघ्र होगा।

इसके लिए गाढ़ा दलिया बनावें। पतले दलिया को आसानी से चबा नहीं सकेंगे, मुंह की लार न मिल सकेगी, जिसके कारण पाचन शीघ्र न होगा।

जिन लोगों के दांत न हों वह पतला दलिया खायें या उसे खूब चुसकी लेकर खूब मुंह में चुबला-चुबलाकर खायें। भूख से थोड़ा कम ही खायें। अधिक खा लेने पर पाचन शीघ्र न होगा तथा जो तत्व लाभ मिलने चाहिये, न मिल पायेंगे।

दलिया कितना खाना चाहिए ?

आप रोजाना 100 से 250 ग्राम दलिया खा सकते हैं। बाकी अगर आपको किसी प्रकार की कोई समस्या है तो इसका सेवन करने से पहले चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।

 

दलिया खाने के नुकसान

यदि आप दलिये का अधिक मात्रा में सेवन करते हैं तो ये आपके लिए नुकसानदेह भी साबित हो सकता है क्योंकि इससे आपको पेट फूलना (आफ़रा ) तथा पेट में ऐंठन जैसी सामान्य समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए इसका सेवन उचित मात्रा में ही करें।

FAQ

1.क्या दलिया से वजन बढ़ता है?

बहुत से लोगों का यह मानना है की दलिये से वजन बढ़ता है। लेकिन आज हम उन्हे बताते हैं की दलिये के सेवन से वजन नहीं बढ़ता।

2.दलिये की तासीर कैसी होती है ?

दोस्तों दलिये की तासीर गर्म होती है। इसी कारण से दलिये को सर्दी में अधिक खाया जाता है ताकि शरीर का तापमान गरम रहे।

3.दलिये में कितनी कैलोरी होती है ?

एक कप दलिये में 150 कैलोरी होती हैं।

4.क्या दलिया खाने से वजन बढ़ता है?

दलिये में  फाइबर, प्रोटीन तथा आयरन होता है, जो आपका वजन कम करने में सहायक हैं।

 

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