अलसी के फायदे एंव नुकसान | Flaxseeds Benefits and Side-effects in Hindi

आज हम आपको इस लेख में अलसी के फायदों के बारे में बताएंगे। आप अलसी के फायदे देखकर हैरान हो जाएंगे एक सामान्य सा दिखने वाला बीज इतनी सारी बीमारियों में काम आता है। तो चलिए सबसे पहले हम जानते हैं कि अलसी क्या होती है। 

अलसी का परिचय

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आकार में अलसी के बीज बहुत छोटे होते हैं। अलसी का उपयोग औषधियों के रूप में क्या जाता है। भारत में अलग अलग जगहों के अनुसार अलसी के रंग तथा आकार में भी फर्क पाया जाता है।

इसकी तासीर गर्म होती है इसलिए गर्म क्षेत्र वाली अलसी सबसे गुणकारी मानी गई है। वैसे तो ज्यादातर खाने के लिए अलसी के बीजों का उपयोग किया जाता है लेकिन इसके तेल के भी बहुत सारे प्रयोग है जिनको हम अलग अलग समस्याओं में प्रयोग करते हैं। 

वैसे तो अलसी के नाम से सभी लोग परिचित है लेकिन इसके चमत्कारिक गुणों के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। अलसी में मुख्य पौष्टिक तत्व ओमेगा -3 फैटी एसिड, एल्फड निनोलेनिक एसिड लिग्निन, प्रोटीन, फाइबर होते है। अलसी में 30-40 प्रतिशत तेल, 25 प्रतिशत प्रोटीन, फाइबर विटामिन बी, सेलेनियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम क्रोमियम, कॉपर, जिंक, पोटोशियम लोहा, फोलेट आदि तत्त्व होते हैं। इसमें मौजूद तेल में 36-55 प्रतिशत ओमेगा -3 होता है। 

पृथ्वी पर लिग्निन का सबसे बड़ा स्त्रोत अलसी है। जो जीवाणु रोधी, विषाणु रोधी, फफूंद रोधी व कैंसर रोधी है। इसका सेवन आप उम्र के किसी भी पड़ाव में कर सकते हैं क्योंकि यह आपके शरीर की रक्षा प्रणाली को मजबूत कर शरीर को बाहरी आक्रमण से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है। 

लिग्निन वनस्पति जगत का एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। लिग्निन मासिक धर्म को नियमित तथा अभ्यस्त गर्भपात का प्राकृतिक उपचार और दुग्ध वर्धक है। 

अलसी के अन्य नाम

English Name- Flaxseed, Linseed

Hindi Name- अलसी

Sanskrit Name of Flaxseed- नील पुष्पी

अलसी को कैसे खाएं

अलसी को सुपरसीड के नाम से जाना जाता है। अलसी को हम किसी भी रूप में अपने भोजन में शामिल कर सकते है। इसके ऊपर का छिलका सख्त होने के कारण इसे पीसकर खाना ज्यादा लाभकारी माना जाता है।

कुछ लोगों का मत है कि अलसी की प्रकृति गर्म होती है इसलिए इसे गर्मी के मौसम में नहीं खाना चाहिए। बाकी एलसी काम उपयोग हम किसी भी महीने में कर सकते हैं यह प्रयोग द्वारा सिद्ध हो चुका है। 

अगर आप गर्मी के मौसम में अलसी खा रहे हैं तो इसकी मात्रा थोड़ी कम कर दें। गर्मियों में आप 10 से 15 ग्राम प्रतिदिन खा सकते हैं

अलसी खाने के लिए तैयार कैसे करें?

  • सबसे पहले आप अलसी को कढ़ाई में दो 3 मिनट तक भून लें।
  • इसके इसके बाद आप भुने हुए अलसी को मिक्सी में पीस ले।
  • फिर इस पाउडर का उपयोग आप आटे में मिला कर रोटियां बना सकते हैं। 
  • दूध तथा सब्जियों में भी मिलाकर इसका सेवन किया जा सकता है
  • अलसी के लड्डू अथवा पंजीरी बनाकर खा सकते हैं।
  • अलसी के पाउडर को आप गुड के साथ भी खा सकते हैं
  • इस इस पाउडर को आप बनाना शेक तथा आम के से एक मैं मिलाकर भी खा सकते हैं।

अलसी खाने के फायदे

कैंसर में अलसी

डॉक्टर बडविग जो कि जर्मनी के रहने वाले हैं उन्होंने 20 वर्षों तक अच्छे से 1000 रोगियों पर इसका परीक्षण किया। जिसमें यह पाया गया कि ओमेगा-3 फैटी एसिड कैंसर की गांठों को पिघलाने तथा कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने में काफी सहायक है। इससे यह साबित होता है कि कैंसर के रोगियों के लिए अलसी का सेवन बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। 

फोड़े फुंसियों के लिए अलसी

अलसी के बीजों को सिलबट्टे पर पीसकर उसे गर्म करें फिर इसकी पोटली बनाकर प्रभावित जगह पर बांध दें।

इसके अलावा आप अलसी को पानी में पीसकर, उसमें थोड़ा दही मिलाकर आपको फोड़े वाली जगह पर उसका लेप लगाना चाहिए। इससे थोड़ा फोड़ा पक जाएगा और उसका मवाद बाहर निकल जाएगा।

ह्रदय रोगों में अलसी 

ओमेगा-3 फैटी एसिड आपके रक्त कोलेस्ट्रॉल को 25% तथा ट्राइग्लिसराइड लेवल को 65% तक कम कर सकता है और धमनियों में रक्त को जमने नहीं देता है। इससे आपकी रक्त की धमनियां बिलकुल साफ रहती है। इस प्रकार यदि आपकी धमनियों में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न ही नहीं होगा तो निश्चित ही आपका हृदय स्वस्थ रहेगा।

खांसी और दमे में अलसी 

अलसी के बीजों को कुटे, फिर उसे पानी में उबाल लें। इसके पश्चात इस मिश्रण में 15 से 20 ग्राम तक मिश्री मिलाएँ। इसके सेवन से आपको खांसी व दमे की बीमारी में काफी लाभ मिलेगा।

अनिंद्रा में अलसी

यदि आपको नींद ना आने की समस्या है तो आपको अलसी और अरंडी के तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर कांसे की थाली में रख दे। इसके पश्चात इन्हें अच्छे मिलाएँ और अपनी आँखों पर लगाएं। ऐसा करने से आपको नींद न आने की समस्या में काफी लाभ मिलेगा। जिसके फलस्वरूप आप सुखपूर्वक नींद का आनंद उठा सकेंगे।

मधुमेह के रोगियों के लिए

शरीर में ओमेगा-3 या ओमेगा -6 की कमी के कारण भी मधुमेह जैसी समस्याएं हो सकती है। क्योंकि अलसी में शर्करा बिलकुल भी नहीं होती। यह आपके शरीर में बीएनआर बढ़ाती है। यह आपके शरीर की चर्बी कम करके है शक्तिशाली मजबूत बनाती है। इसलिए यदि आप मधुमेह की समस्या से बचना चाहते हैं तो दैनिक जीवन में अलसी का प्रयोग शुरू कर दें।

हैजे में अलसी

यदि आपको हैजा की समस्या है तो आपको अलसी के पांच ग्राम चूर्ण में 50ML गर्म पानी मिलाएँ और इस मिश्रण को रोगी को 1 दिन में तीन से चार बार ठंडा करके पिलाएं।

इसके सेवन से हजे के रोगियों को काफी लाभ मिलेगा।

जोड़ों के दर्द में अलसी

अलसी का लगातार सेवन आपके जोड़ों में लचीलापन पैदा करता है तथा दर्द को कम करता है। कमर दर्द तथा गाठिया के रोगियों को अलसी के ग्राम अलसी के तेल को गर्म कर उसमें संखी का चूर्ण मिलाएं फिर इस तेल से मालिश की जाए। तो इन रोगियों को दर्द में काफी राहत मिलेगी।

धातु दुर्बलता में अलसी

अलसी के पाउडर में बराबर मात्रा में देसी खांड तथा आधा भाग देशी घी मिलाएं। इस मिश्रण को रोगी को दिन में दो से तीन बार एक – एक चम्मच खिलाएं। कुछ दिनों में आप देखेंगे कि दुर्बलता में कम आ रही है और पुरूषत्व में वृद्धि हो रही है।

बालों के लिए अलसी

यदि आपको बाल झड़ने की समस्या है तो आपको रोजाना एक चम्मच अलसी का पाउडर का सेवन करना चाहिए। कुछ दिनों में आ पाएंगे कि आपके बाल झडने कम हो गए।

बवासीर में अलसी

यदि आप अलसी का रोजाना सेवन करते हैं तो आपकी बवासीर की समस्या जड़ से खत्म हो सकती है क्योंकि इसके तेल का रोजाना सेवन करने से कब्ज सही होती है और धीरे धीरे आपकी बवासीर की समस्या भी खत्म होने लगती है।

पेट के रोगों में अलसी

यदि आपको पेट से संबंधित समस्याएं बार बार होती है तो आपको अलसी का सेवन रोज़ करना चाहिए क्योंकि यह धीरे धीरे पेट की समस्याएं को ख़त्म कर सकती है।

पित की पथरी में अलसी 

यदि आपको पित की थैली में पथरी बनती है तो आपको अलसी का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि इसके सेवन से आपकी छोटी पथरियां घुलनी शुरू हो जाती है।

अलसी का तेल

यदि अलसी को ओर्गेनिक तरीके से उगाया गया तथा बिल्कुल शुद्ध तरीके से निकाले गये तेल को अमृत के समान माना गया है। अलसी के तेल को हमेशा ठंडी जगह व अंधेरे में रखना चाहिए।

अलसी के तेल का प्रयोग छोटे बच्चों से लेकर बूढ़े व्यक्ति भी कर सकते हैं। 1 दिन में 5ML तेल का सेवन करना चाहिए। छोटे बच्चों को उनकी आयु के अनुसार इसका सेवन करवाना चाहिए। इस तेल का प्रयोग आप सब्जियों, दही तथा सलाद में मिलाकर कर सकते हैं।

अलसी का काढा

यदि आप अलसी का काढ़ा बनाकर रोजाना सेवन करते हैं तो ये भी बहुत से रोगों में लाभकारी सिद्ध हुआ है। हम आगे चलते हैं और देखते हैं की अलसी का काढ़ा कैसे बनाते हैं और अलसी के काढ़े के फायदे क्या क्या है?

अलसी का काढ़ा कैसे बनाएँ?

अलसी का काढ़ा बनाने के लिए दो चम्मच अलसी के बीज में दो कप पानी मिलाएं और इसको धीमी आंच पर उबालें। जब यह है काढा आधी मात्रा में हो जाए, तब ठंडा करके छान लें। इसके पश्चात इसका ठेका सेवन करें।

इस काढ़े के नियमित रूप से सेवन करने से व्यक्ति बहुत से रोगों से बचा रहता है।

अलसी काढ़े के फायदे

  • यदि आपको ह्रदय से संबंधित कोई समस्या है तो आपको अलसी का काढ़ा रोजाना पीना चाहिए।इसके नियमित रूप से तीन-चार महीने तक सेवन करने से आपकी धमनियों की ब्लॉकेज खुल सकती है।
  • यदि आपको डायबिटीज़ की समस्या है तो इसका नियमित रूप से खाली पेट सेवन करें। कुछ दिनों के बाद आपका ब्लड शुगर नियंत्रण में आ जाएगा।
  • थायरॉइड की समस्याओं में भी अलसी के काढ़े का सेवन बेहद फायदेमंद साबित हुआ है। इसलिए थायरॉयड के रोगियों को भी इसका नियमित रूप से सेवन करना चाहिए।
  • यदि आपको साइटिका या अन्य जोड़ों का दर्द है तो भी आपको अलसी का काढ़ा पीना चाहिए। क्योंकि जोड़ों एवं नसों की समस्याओं में भी अलसी के काढ़े के अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं।
  • अलसी के काढ़े का नियमित रूप से सेवन, आपके अतिरिक्त वजन को भी काफी हद तक कम कर सकता है।
  • इसके सेवन से कमजोरी, सुस्ती, आलस भी दूर होता है।
  • अलसी के काढ़े का नियमित सेवन से शरीर की गाँठे पिघलनी शुरू हो जाती है।

अलसी खाने के नुकसान

एलर्जी होना

यदि आप यदि आप किसी को ज्यादा मात्रा में ग्रैंड करते हो तो आपको दर्जी की समस्या हो सकती है किसी के साथ ही आपको लो ब्लडप्रेशर तथा सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

इसी के साथ आपको घबराहट भी हो सकती है।

अन्य दवाओं के साथ रिऐक्शन

यदि आप खून को पतला करने वाली दवाइयां ले रहे हैं तो आपको अलसी का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए। किसी के साथ यदि हाँ फिर ब्लड शुगर की दवाएं ले रहे हैं वो भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। इसलिए हम आपको यह सलाह देते हैं की अलसी का सेवन करने से पहले एक बार अपने चिकित्सक से परामर्श जरूरकरें

दस्त की समस्या होना

अगर आप अलसी की अधिक मात्रा का सेवन करते हैं तो आपके पेट में गड़बड़ी हो सकती है जिससे की आपको दस्त की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

इसके अलावा आपको बार बार पेशाब की समस्या भी हो सकती है। इसलिए आपको इन समस्याओं से बचने के लिए अलसी से दूर रहना चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान अलसी के नुकसान

यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको अलसी से दूरी बनाए रखनी चाहिए क्योंकि उसी के अन्दर ऑस्ट्रोजेन हार्मोन ओके गुण पाए जाते हैं। जिसके फलस्वरूप आपको मासिक धर्म की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। अगर आप स्वयं और अपने बच्चे को सुरक्षित रखना चाहती है तो अलसी के सेवन से बचना चाहिए।

आंतों की समस्या

अगर आप अलसी का अत्यधिक मात्रा में सेवन करते हैं तो यह आपकी आंतों को काफी नुकसान पहुंचाती है। यदि आप इस समय पानी या अन्य तरल पदार्थों का सेवन कम करते हैं तो आपकी आंतें के ब्लॉक होने की संभावना और भी अधिक बढ़ जाती है।

अक्सर अलसी से संबंधित पूछे जाने वाले सवाल

Q.1 अलसी की तस्वीर कैसी होती है?

Ans. इसकी तासीर गर्म होती है।

Q.2 क्या अलसी के सेवन से मुंहासे हो सकते है?

Ans. कई शोधों में पाया गया है कि अलसी का सेवन आपके मुहासों को कम कर सकता है। बाकी अधिकतर ऐसी कोई समस्या सामने नई आई है मगर फिर भी आपको अलसी के सेवन से इस प्रकार की कोई समस्या होती है तो एक बार अपने चिकित्सक से सलाह जरूर लें।

Q.3 क्या अलसी से पेट कम होता है?

Ans. अलसी के अंदर फाइबर की मात्रा प्रचूर मात्रा में पाई जाती है और फाइबर आपके पाचन तंत्र को दुरुस्त बनाए रखने में काफी सहायक होता है। यदि आपका पाचन सही से काम करेगा निश्चित ही आपके पेट की चर्बी भी अवश्य कम होगी।

Q.4 क्या हम अलसी से तैयार कैप्सूल खा सकते हैं?

Ans. अलसी के बीजों से बने हुए कैप्सूल को आप बिना डॉक्टर की सलाह लिए नहीं खा सकते हैं।

Q.5 अलसी खाने का सबसे अच्छा तरीका कौन सा है?

Ans. अगर आप इसके उपयोग की बात करें तो इसे कच्चा भी खा सकते हैं मगर इसे थोड़ा भूनकर फिर इसका पाउडर बनाकर इसका सेवन किया जाए तो सबसे ज्यादा फायदे होंगे।

Q.6 अलसी को कहाँ से खरीदे?

Ans. आजकल तो आप इसे ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं और वैसे अलसी आपको सामान्य किराने के स्टोर अथवा पंसारी की दुकान पर आसानी से मिल सकती है।

Q.7 क्या चिया सीड्स को अलसी की जगह खा सकते हैं?

Ans. हां, इन दोनों बीजों के न्यूट्रिशन वैल्यू में काफी समानता है। तो आप इन दोनों में से किसी एक को खा सकते हैं।

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